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देहरादून को स्लम-मुक्त बनाने की पहल तेज, जिलाधिकारी ने संभाला मोर्चा

देहरादून — मुख्यमंत्री की जनभावनाओं से प्रेरित होकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने राजधानी देहरादून को मलिन बस्तियों से मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ऋषिपर्णा सभागार में शनिवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम, एमडीडीए, सिंचाई विभाग व अन्य रेखीय विभागों के अधिकारियों के साथ मलिन बस्तियों के पुनर्वास को लेकर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर की सभी बस्तियों — विशेष रूप से बिंदाल और रिस्पना नदी किनारे बसी बस्तियों — का चिन्हीकरण करते हुए वर्ष 2016 से पूर्व और उसके बाद बसी 88 बस्तियों की अद्यतन सूची पांच दिन के भीतर प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही पुनर्वास के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित कर, एमडीडीए से सभी संभावित भूमि पार्सल की रिपोर्ट तलब की गई है।

बंसल ने कहा, “राजधानी को स्लम-मुक्त बनाना केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता है। मलिन बस्तियों में रहने वाले नागरिक भी हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अब किसी भी प्रकार के कानूनी या विभागीय पेच को बहाना बनाकर टालमटोल नहीं चलेगी। “प्रशासन जब कमिटमेंट करता है, तो उसे पूरा करता है।”

पर्यावरण संरक्षण के साथ पुनर्वास

जिलाधिकारी ने बताया कि नदियों के किनारे से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही न्यायालय के आदेशों के अनुरूप की जाएगी और इसके साथ ही पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन नागरिकों को उनके व्यवसाय से जोड़ते हुए, उनकी नई पीढ़ी के लिए बेहतर जीवन और शिक्षा के अवसर सुलभ हों।

उन्होंने बताया कि रिस्पना और बिंदाल नदी पर क्रमशः 11 किमी और 15 किमी लंबे चार-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की योजना प्रस्तावित है, जिसके तहत सीवर, बिजली और हाईटेंशन लाइनों को नदी क्षेत्र से बाहर शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही नदी के दोनों ओर रिटेनिंग वॉल का निर्माण, बाढ़ सुरक्षा उपाय और सौंदर्यीकरण कार्य भी किए जाएंगे।

“यह असंभव नहीं, संकल्प है” — डीएम

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को मानसिक रुकावटों से बाहर निकलने का आह्वान करते हुए कहा, “यह सोचना बंद करें कि स्लम को हटाना असंभव है। यह हमारी उदासीनता का परिणाम है, जिसे हमें ही ठीक करना है। अब समय आ गया है कि सभी विभाग मिलकर एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें और जमीन पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।”

बैठक में उपस्थित अधिकारीगण:

बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर नगर आयुक्त हेमंत कुमार वर्मा, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, उप नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल, अधीक्षण अभियंता सिंचाई शरद श्रीवास्तव, डीजीसी नितिन विशिष्ट, एमडीडीए से अतुल गुप्ता, नीतिन गुप्ता एवं ईडीएम हरेंद्र शर्मा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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