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उत्तराखंड में शीतलहर तेज: डॉक्टरों ने बढ़ते वायरल संक्रमण को लेकर दी चेतावनी

उत्तराखंड में शीतलहर का असर बढ़ने के साथ वायरल संक्रमण, फ्लू और मौसमी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देहरादून के डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनने, सावधानी बरतने और विटामिन-सी युक्त आहार लेने की सलाह दी है ताकि बदलते मौसम में प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।

देहरादून, 21 नवंबर: प्रदेशभर में शीतलहर के प्रभाव में तेजी देखी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक तापमान में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह और शाम के समय ठंडक बढ़ने के साथ चल रही सर्द हवाओं ने लोगों को बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। राजधानी देहरादून समेत अन्य जिलों में वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इस स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है।

डॉक्टरों का कहना है कि नवंबर और दिसंबर संक्रमण फैलने के लिहाज से सबसे संवेदनशील महीने होते हैं। इस दौरान प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने से वायरल बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में बुजुर्ग और बच्चे सबसे पहले संक्रमण की चपेट में आते हैं। चिकित्सकों ने ठंडी हवाओं से बचाव, गर्म कपड़ों का उपयोग और खान-पान में सावधानी बरतने की अपील की है।

स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टरों की सलाह:

संयुक्त निदेशक (बाल रोग) डॉ. एस. के. झा ने बताया कि मौसम में तेजी से आ रहे बदलाव के कारण वायरल इंफेक्शन और फ्लू के मामले काफी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेषकर छोटे बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। स्कूल जाने वाले बच्चों को अच्छी तरह ऊनी कपड़े पहनाकर ही भेजें। उन्होंने केले और अमरूद के सेवन से फिलहाल दूर रहने की भी सलाह दी है, क्योंकि मौसम परिवर्तन के दौरान ये फल कुछ बच्चों में गले और पाचन संबंधी परेशानियाँ बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टरों ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की अनदेखी न करें और थोड़ी सी भी लापरवाही से बचें, क्योंकि यह संक्रमण के खतरे को कई गुना बढ़ा सकती है। गर्म कपड़े, सही खान-पान और समय पर सावधानी ही इस मौसम में स्वस्थ रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

 

 

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