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उत्तराखंड की सियासत में पिछले लंबे समय से मुख्यमंत्री बदलने को लेकर जो ‘कयासों का बाजार’ गर्म था, उस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे ने पूरी तरह बर्फ डाल दी है। विपक्ष और सत्तापक्ष के भीतर ही सुलग रही असंतोष की चिंगारियों को अमित शाह ने अपनी स्पष्ट बयानबाजी से ठंडा कर दिया है। हरिद्वार में आयोजित ‘धामी सरकार के 4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम के मंच से जो सियासी केमिस्ट्री दिखी, उसने विरोधियों के सारे गणित बिगाड़ दिए हैं।
​विरोधियों के ‘दावों’ पर भारी पड़ी ‘शाह की शाबाशी’
​गृह मंत्री ने न केवल सीएम पुष्कर सिंह धामी की पीठ थपथपाई, बल्कि उनके कार्यों को ‘विकास का नया अध्याय’ करार दिया।

शाह के संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:

​ शाह ने कहा कि उत्तराखंड अब ‘सिफारिश और रिश्वत’ के दौर से बाहर निकल चुका है। युवाओं को बिना ‘पर्ची और खर्ची’ के योग्यता के आधार पर नियुक्तियां मिल रही हैं।
​भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले सचिवालय बिचौलियों का अड्डा हुआ करता था, लेकिन धामी सरकार ने भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार कर व्यवस्था को स्वच्छ बनाया है।
​ऐतिहासिक निर्णय: मुख्यमंत्री द्वारा लाए गए नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) की गृह मंत्री ने जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि UCC लागू कर धामी ने जनसांख्यिकी संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाया है।
​2027 तक धामी का ‘किला’ अभेद्य
​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आलाकमान (मोदी-शाह-नड्डा) का धामी पर यह अटूट भरोसा एक बड़ा संदेश है। 23 मार्च को अपने दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे कर रहे धामी ने कई कड़े और निर्णायक फैसले लिए हैं, जिनमें शामिल हैं:
​कानून व्यवस्था: धर्मांतरण रोधी कानून और ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के जरिए देवभूमि की अस्मिता की सुरक्षा।
​सांस्कृतिक पुनरुत्थान: मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत पौराणिक मंदिरों का कायाकल्प।
​आर्थिक विजन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और ‘लखपति दीदी’ योजना के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा।
​आधुनिकता: देहरादून में एआई-आधारित ट्रैफिक सिस्टम जैसे तकनीकी सुधार।

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