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एबीवीपी का बड़ा बयान: देश में आरक्षण व्यवस्था बेहद जरूरी, एनटीए में सुधार और कोचिंग पर नकेल कसने की मांग

एबीवीपी का बड़ा बयान: देश में आरक्षण व्यवस्था बेहद जरूरी, एनटीए में सुधार और कोचिंग पर नकेल कसने की मांग

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने हाल ही में देश की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। संगठन का मानना है कि समाज के सभी वर्गों को समान रूप से आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था बेहद जरूरी है और यह जारी रहनी चाहिए।

आरक्षण और सामाजिक समरसता पर विचार

एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्होंने उन लोगों को इस विषय पर गहराई से विचार करने की सलाह दी जो मौजूदा आरक्षण नीति में बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग करते हैं। संगठन की विचारधारा सामाजिक समरसता पर टिकी हुई है, इसलिए देश की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का समर्थन किया जाना आवश्यक है।

एनटीए व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता

परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को पुख्ता करने के लिए छात्र संगठन ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में पूर्ण फेरबदल की मांग की है। परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और फूलप्रूफ बनाने के वास्ते एनटीए में स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति पर जोर दिया गया है। संगठन का कहना है कि आउटसोर्सिंग को कम किया जाना चाहिए, पेपर-सेटिंग प्रणाली को मजबूत किया जाए और परीक्षा की घोषणा से लेकर परिणाम आने तक हर स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कोचिंग माफिया पर लगाम और कड़े नियम

छात्र संगठन ने देश में सक्रिय कोचिंग माफिया पर नकेल कसने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता जताई है। इसमें कोचिंग संस्थानों द्वारा ली जाने वाली फीस और वहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या पर एक निश्चित सीमा (कैप) तय करना शामिल है। चूँकि स्कूल-कॉलेज प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी तैयारी कराने में असमर्थ रहते हैं, इसलिए एक समानांतर कोचिंग उद्योग का विस्तार हुआ है। इस उद्योग को रातों-रात समाप्त तो नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा कानूनों का सख्ती से पालन कराकर इसे विनियमित जरूर किया जा सकता है।

युवा पीढ़ी और शैक्षणिक संस्थान

संगठन के अनुसार आज की युवा पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक जागरूक और समझदार है। इंटरनेट मीडिया के इस दौर में युवा हर बात को गहराई से समझते हैं, इसलिए उनका अनावश्यक राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए। इसके विपरीत, उन्हें राष्ट्र निर्माण और विकास कार्यों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाना बेहद जरूरी है। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीति का केंद्र या अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।

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