Site icon Memoirs Publishing

करोड़ों की लागत से बनी कृषि मंडी और अधूरी सड़क किसानों की राह में बनी बड़ी बाधा

करोड़ों की लागत से बनी कृषि मंडी और अधूरी सड़क किसानों की राह में बनी बड़ी बाधा

उत्तराखंड के रवांई घाटी की स्योरी फल पट्टी के काश्तकारों को लगभग दस करोड़ रुपये की लागत से तैयार कृषि उत्पादन मंडी समिति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस मंडी का निर्माण पूरा हुए करीब डेढ़ वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसके परिसर में बनी 16 दुकानें भी उपयोग के इंतजार में केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।

मंडी शुरू न होने से बिचौलियों पर निर्भरता

क्षेत्र में सेब, टमाटर, आलू, मटर और फ्रेंचबीन जैसी नगदी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। स्थानीय स्तर पर विपणन की सही व्यवस्था न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बाहर भेजने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे उनकी परिवहन लागत बढ़ जाती है और उन्हें फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता है। इस वर्ष भी समय पर मंडी शुरू न होने के कारण टमाटर की तुड़ाई न होने से फसल खेतों में ही खराब हो गई।

अधूरी सड़क ने बढ़ाई जौनपुर के किसानों की मुश्किलें

दूसरी ओर, जौनपुर विकासखंड की सकलाना पट्टी में श्रीपुर-त्यारखा-धौलागिरी मोटर मार्ग का निर्माण शासनादेश जारी होने के लगभग एक दशक बाद भी अधूरा पड़ा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा साढ़े चार किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण पूरा न किए जाने से ग्रामीण आज भी पैदल दूरी तय करने को मजबूर हैं। सड़क सुविधा के अभाव में अदरक, अरबी, मटर और आलू जैसी नकदी फसलों को सिर या कंधों पर ढोकर दुर्गम रास्तों से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याएं

सड़क न होने के कारण केवल कृषि कार्य ही प्रभावित नहीं हो रहा है, बल्कि क्षेत्र की आठ सौ से अधिक आबादी को आवाजाही में भी परेशानी होती है। बच्चों को भी कई किलोमीटर जंगल के रास्ते पैदल स्कूल जाना पड़ता है। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द मंडी का संचालन शुरू करे और अटके हुए सड़क निर्माण कार्यों को पूरा करे ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही फल मिल सके।

Exit mobile version