हाल के दिनों में यातायात नियमों की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इन प्रणालियों की कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल भी खड़े हुए हैं। तकनीक के जरिए ली गई तस्वीरों और चालान के मामलों में यह देखा गया है कि कैमरे हर स्थिति के पीछे के संदर्भ को पूरी तरह समझने में सक्षम नहीं हैं। चाहे बात ऑस्ट्रेलिया की हो या भारत के बेंगलुरु शहर की, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां तकनीकी भूल की वजह से लोगों को अनुचित जुर्माने का सामना करना पड़ा है।
तकनीक की नजर और वास्तविक स्थिति में अंतर
ऑस्ट्रेलिया में एआई कैमरों द्वारा सीट बेल्ट के कथित उल्लंघनों को लेकर कई दिलचस्प और हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। एक मामले में कार चला रही महिला की सास ने चेहरे पर खुजली करने के लिए हाथ उठाया, जिससे सीट बेल्ट का ऊपरी हिस्सा छिप गया। इस पर कैमरे ने इसे नियम उल्लंघन मानकर भारी जुर्माना लगा दिया। इसी तरह तेज धूप के कारण कपड़ों में सीट बेल्ट के छिप जाने या बच्चे द्वारा बेल्ट की स्थिति बदलने पर भी वाहन चालकों को चालान थमा दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक, शुरुआती दौर में ही वहां हजारों ड्राइवरों ने इन فیصلों के खिलाफ अपील की जिनमें से अधिकांश मामलों में जुर्माने वापस लेने पड़े।
भारत में भी सामने आ रहे हैं ऐसे ही मामले
अब इस प्रकार की तकनीकी त्रुटियां भारत में भी देखने को मिलने लगी हैं। बेंगलुरु में एक व्यक्ति जब अपनी स्कूटर पर सवार होकर जा रहा था और उसकी पीठ पर गिटार बंधा हुआ था, तब एआई कैमरे ने उस गिटार को पीछे बैठा हुआ यात्री मान लिया। कैमरे को यह भी लगा कि उस सवारी ने हेलमेट नहीं पहना है, जिसके चलते वाहन चालक पर जुर्माना लगा दिया गया। इसी प्रकार बेलगावी जिले में भी एक कार चालक पर बिना हेलमेट गाड़ी चलाने का अजीबोगरीब चालान भेजे जाने का मामला सामने आया।
संदर्भ को समझने में इंसानी दखल क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि कैमरा भले ही किसी वस्तु या आकृति की स्पष्ट तस्वीर ले ले, लेकिन उसके पीछे छिपे संदर्भ का विश्लेषण करना उसके लिए मुमकिन नहीं होता। कोई व्यक्ति सर्जरी के बाद मेडिकल कारणों से सीट बेल्ट की स्थिति बदल सकता है या वाहन पर कोई अन्य सामान बंधा हो सकता है। इंसानी दिमाग जैसी समझ और परिस्थिति का आंकलन करने की क्षमता फिलहाल एआई में नहीं है। यही वजह है कि यातायात निगरानी जैसे मामलों में पूरी तरह मशीनों पर निर्भर रहने के बजाय मानवीय हस्तक्षेप और समीक्षा का होना आज भी बेहद आवश्यक माना जा रहा है।

