संयुक्त राज्य अमेरिका में दक्षिण एशियाई मूल के नागरिकों और प्रवासियों के खिलाफ ऑनलाइन शत्रुता में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। वाशिंगटन स्थित गैर-लाभकारी संगठन सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दक्षिण एशियाई विरोधी नफरत में 240 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शोधकर्ताओं ने इस दौरान पांच लाख से अधिक अपमानजनक और नफरत फैलाने वाले पोस्ट की पहचान की है, जो आव्रजन, नौकरियों और अमेरिकी समाज में दक्षिण एशियाई लोगों की स्थिति को लेकर बढ़ते तनाव को दर्शाते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नफरत का बढ़ता दायरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच इस तरह की सामग्री में भारी उछाल आया है। इस दौरान मासिक आधार पर ऐसे पोस्ट की संख्या 12,904 से बढ़कर 43,843 तक पहुंच गई। इस वृद्धि के पीछे राजनीतिक माहौल, आव्रजन नीतियों और एच-1बी वीजा जैसे मुद्दों पर छिपी बहस को मुख्य कारण माना गया है। जानकारों का कहना है कि राजनीतिक बयानों और दक्षिण एशियाई समुदाय की बढ़ती सार्वजनिक दृश्यता ने इस डिजिटल नफरत को और हवा दी है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनित सामग्री का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
रोजगार, आव्रजन और राजनीतिक माहौल का प्रभाव
विश्लेषकों के अनुसार, इस ऑनलाइन शत्रुता का सीधा असर भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है। कई कुशल पेशेवर, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इस बदलते माहौल से प्रभावित हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से न केवल प्रवासियों को व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच के जन-संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को भी प्रभावित कर सकता है।
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि ऑनलाइन मंचों पर फैलने वाली नफरत को रोकने के लिए संबंधित कंपनियों को अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। नफरत भरे भाषणों और नस्लीय टिप्पणियों को बढ़ावा देने वाली सामग्री पर लगाम लगाना आवश्यक है, ताकि प्रवासी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और समाज में सौहार्द बनाए रखा जा सके।

