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असम पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए सीजेपी के आशुतोष रांका रिहा

असम पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए सीजेपी के आशुतोष रांका रिहा

असम में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता आशुतोष रांका और उनके साथ हिरासत में लिए गए अन्य स्वयंसेवकों को रविवार शाम को रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उनकी अवैध हिरासत अब समाप्त हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पुलिस से आग्रह किया था कि उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ा जाए जहां से उन्हें पहले हिरासत में लिया गया था।

हिरासत में लेने की घटना और स्थान

इससे पहले, आशुतोष रांका और 40 से अधिक सीजेपी स्वयंसेवकों को गुवाहाटी के चौधरी टिला में विपक्षी असम जातीय परिषद (एजेपी) की नेता कुनकी चौधरी के आवास से पुलिस ने उठाया था। यह सभी लोग एक निर्धारित बैठक में शामिल होने के लिए एकत्र हुए थे। पुलिस इस समूह को शहर के कहिलिपारा इलाके में स्थित 10वीं असम पुलिस बटालियन के मुख्यालय ले गई थी, जबकि इस मामले में अधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया में चुप्पी साधे रखी थी।

रिहाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप

अपनी रिहाई के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि असम पुलिस ने उन्हें और उनकी टीम को पूरी तरह से अवैध तरीके से हिरासत में लिया था। जब उन्होंने पुलिस से आधार के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और उनके पास ऊपर से आदेश आए थे।

रांका ने कहा कि सीजेपी स्वयंसेवकों की इस निर्धारित बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इनमें यह बात शामिल थी कि राज्य के स्कूलों में कैसे सुधार किया जा सकता है, काजीरंगा के मूल निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे की जा सकती है, और अप्रैल के चुनाव में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा तय करके सत्तारूढ़ दल ने कैसे वापसी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लोगों से डरते हैं और अपनी बात रखने से रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे का आंदोलन

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रवक्ता अनीश गवंडे ने भी मीडिया के सामने बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष रांका और 41 अन्य लोगों को एक निजी आवास से पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक तरीके से हिरासत में लिया गया था, जबकि वहां स्वयंसेवकों की एक पूर्व निर्धारित बैठक होनी थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान न तो कोई कानूनी नोटिस दिया गया और न ही यह बताया गया कि किस धारा के तहत कार्रवाई की जा रही है।

रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन पूर्वोत्तर भारत में अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेगा। उन्होंने दावा किया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे और प्रशासन के संसाधनों के बावजूद पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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