देशभर के बैंक कर्मचारियों की ओर से सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल के चलते बैंकिंग कामकाज पर असर पड़ सकता है। बैंक यूनियनों की मुख्य मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग कार्य दिवस लागू करने की है, जिसके विरोध में यह कदम उठाया जा रहा है। सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत के बावजूद अब तक इस पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
क्यों हो रही है बैंक हड़ताल?
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांग बैंकों में फाइव-डे वर्क वीक यानी सप्ताह में पांच दिन काम करने की व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान नियमों के तहत महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश होता है, जबकि अन्य शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। यूनियनों का कहना है कि पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था को जल्द लागू किया जाना चाहिए, जो कि पिछले वेतन समझौतों का भी हिस्सा रहा है। सरकार का कहना है कि यह मुद्दा अभी विचाराधीन है और इसे बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
लगातार पांच दिन बंद रह सकती हैं बैंक शाखाएं
यदि प्रस्तावित हड़ताल टलती नहीं है, तो बैंक ग्राहकों को लगातार पांच दिनों तक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हड़ताल की तारीखें 28, 29 और 30 सितंबर 2026 निर्धारित हैं। इससे ठीक पहले 26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार होने के कारण साप्ताहिक अवकाश रहेगा। ऐसे में लगातार पांच दिनों तक बैंक शाखाओं के माध्यम से होने वाले कार्य बाधित हो सकते हैं।
क्या-क्या सेवाएं रहेंगी प्रभावित?
बैंक शाखाओं में कर्मचारियों के माध्यम से होने वाले कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा। इनमें निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं:
- बैंक शाखाओं में नकद जमा और निकासी
- पासबुक अपडेट कराने का काम
- चेक क्लियरिंग और ड्राफ्ट संबंधी सेवाएं
- लोन प्रक्रिया और अन्य शाखा-आधारित कार्य
डिजिटल और वैकल्पिक माध्यमों से जारी रहेंगी सेवाएं
हड़ताल के दौरान सभी बैंकिंग माध्यम पूरी तरह बंद नहीं रहेंगे। ग्राहक एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकेंगे। हालांकि, कुछ विशिष्ट सेवाओं की उपलब्धता स्थानीय परिस्थितियों और संबंधित बैंक पर निर्भर करेगी। सरकार और बैंक प्रबंधन ने ग्राहकों को असुविधा से बचने के लिए डिजिटल चैनलों का उपयोग करने की सलाह दी है।

