Site icon Memoirs Publishing

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बीरभूम के पत्थर खदान मालिक की याचिका की खारिज

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बीरभूम के पत्थर खदान मालिक की याचिका की खारिज

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के फरार चल रहे रेत और पत्थर खदान मालिक मोहम्मद नजीबुद्दीन मंडल, जिसे टुलू मंडल के नाम से भी जाना जाता है, की एक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मंडल ने देश छोड़ दिया है, इसलिए निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

टुलू मंडल के वकील ने निचली अदालत द्वारा 30 जुलाई को जारी किए गए गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट और 10 अगस्त के उद्घोषणा आदेश के खिलाफ अपनी दलीलें रखीं। बचाव पक्ष का तर्क था कि प्राथमिकी दर्ज होने के ही दिन गिरफ्तारी वारंट जारी करना प्रावधानों के खिलाफ था। हालांकि, अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता ने 30 जुलाई को आपराधिक कार्रवाई शुरू होने से काफी पहले, यानी 23 मई को ही देश छोड़ दिया था।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता देश के भीतर होता, तो वारंट जारी करने से पहले कुछ विशेष प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता। चूंकि यह एक स्वीकृत तथ्य है कि वह देश से बाहर जा चुके हैं, इसलिए गिरफ्तारी वारंट में कोई त्रुटि नहीं पाई गई और इसे जांच में सहायता के उद्देश्य से सही ठहराया गया। राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए उन्हें भगोड़ा बताया था।

इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने 20 अगस्त को नकद और सोना जप्त किए जाने के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की टुलू मंडल की याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत के इस नवीनतम निर्णय से उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

Exit mobile version