कोलकाता उच्च न्यायालय ने करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़े एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। अदालत ने नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा जांच में कोई भी संतोषजनक प्रगति न दिखा पाने पर यह सख्त कदम उठाया है।
न्यायालय की इस कार्रवाई का आधार उच्चतम न्यायालय का वह पिछला निर्देश है, जिसके तहत डिजिटल अरेस्ट और रंगदारी से जुड़े सभी मामलों को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का प्रावधान किया गया था। शीर्ष अदालत ने देश में इस तरह के गंभीर साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई थी। नरेंद्रपुर मामले में बुजुर्ग व्यक्तियों को लगभग 2.66 करोड़ रुपये की चपत लगाकर उन्हें आर्थिक रूप से कंगाल किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित बैंक के प्रतिनिधियों की आपत्तियों को खारिज कर दिया। अदालत ने बैंक के वकील से सवाल किया कि क्या बैंक ने कोई शिकायत निवारण पोर्टल स्थापित किया है या नहीं। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि बैंक ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिए पोर्टल नहीं बनाते हैं, तो इस विषय पर आगे कोई चर्चा करने का औचित्य नहीं रह जाता है और उन्हें अब सीधे सीबीआई के सवालों का सामना करना होगा।
यह आदेश जयश्री रामकृष्णन और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिन्होंने इस ऑनलाइन धोखाधड़ी में भारी रकम गंवाने का दावा किया था। उच्च न्यायालय ने नरेंद्रपुर पुलिस थाने को निर्देश दिया है कि वह मामले की डायरी और अन्य सभी संबंधित दस्तावेज आगामी सात दिनों के भीतर सीबीआई को सौंप दे, ताकि जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

