मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठन की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और मुख्य मांगें
यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में मुख्य रूप से यह जांच कराने की मांग की गई है कि मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम किस प्रकार हटाए गए। इसके साथ ही, अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को गैर-कानूनी घोषित करने का आग्रह भी किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट और अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां
याचिका में एक हालिया मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईटी से जुड़े आदेशों और फैसलों पर कई मौकों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां फॉर्म 6 में बदलाव और चुनावी रोल डेटा के प्रबंधन से जुड़े उन फैसलों पर थीं, जो कथित तौर पर अन्य आयुक्तों की जानकारी या सिफारिशों के बिना लिए गए थे।
कानूनी कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने तथा आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन के मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की है। मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के रुख पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

