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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में शिक्षिका की अनूठी मिसाल, उफनती नदियां पार कर पहुंचती हैं स्कूल

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में शिक्षिका की अनूठी मिसाल, उफनती नदियां पार कर पहुंचती हैं स्कूल

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका का समर्पण चर्चा का विषय बना हुआ है। मानसून के दौरान कठिन रास्तों और उफनती नदियों को पार करके यह शिक्षिका रोजाना अपने नौ महीने के बच्चे के साथ शिक्षण कार्य के लिए पहुंचती हैं।

कठिन परिस्थितियों के बावजूद जारी है बच्चों की शिक्षा

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले धौरपुर प्राथमिक विद्यालय में दो महिला शिक्षिकाएं तैनात हैं। बारिश के मौसम में इस क्षेत्र के हालात काफी मुश्किल हो जाते हैं। मोरान और इरिया नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद भी ये दोनों शिक्षिकाएं हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए ये शिक्षिकाएं हर साल मानसून के महीनों में इस चुनौती का सामना करती हैं।

जिला कलेक्टर ने की सराहना

शिक्षिकाओं के इस जज्बे और कर्तव्य के प्रति निष्ठा को देखकर जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने उनकी जमकर सराहना की है। वर्ष 2014 से यहां पदस्थ शिक्षिका कर्मािला टोप्पो ने बताया कि बच्चों का भविष्य उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है, और वे छात्रों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने के लिए हर संभव कठिनाई का सामना करने को तैयार रहती हैं।

स्कूल और क्षेत्र की स्थिति

यह दुर्गम क्षेत्र झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं के पास स्थित है। धौरपुर गांव में केवल 10 से 15 परिवार रहते हैं। स्थानीय बच्चों की बुनियादी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वर्ष 2005 में इस प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की थी, जिसमें वर्तमान में नौ छात्र अध्ययनरत हैं और दो महिला शिक्षिकाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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