दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में हाल ही में हुए संशोधनों के विरोध में सोमवार को एक दिन के लिए न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला किया है। वकीलों का यह विरोध ट्रैफिक चालान के निपटान के नए तंत्र और नियमों में किए गए बदलावों के खिलाफ है। समिति ने इस संबंध में एक सर्कुलर जारी कर सभी सदस्य अधिवक्ताओं से अदालती कार्यवाही से दूर रहने की अपील की है।
संशोधित नियमों पर आपत्तियां
समिति द्वारा जारी सर्कुलर में संशोधित नियम 167 को कठोर और मनमाना बताया गया है। वकीलों ने मुख्य रूप से तीन प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसमें सबसे प्रमुख मुद्दा न्यायिक मजिस्ट्रेटों से विवादित चालान के फैसले के अधिकार को हटाकर उप-विभागीय मजिस्ट्रेटों (SDMs), कार्यकारी मजिस्ट्रेटों और अन्य विभागीय अधिकारियों को सौंपना है। इसके अलावा, खाद्य एवं आपूर्ति, तहसीलदार और जिला परिवहन एवं प्रवर्तन कार्यालयों के अधिकारियों को चालान के निवारण के लिए नामित किए जाने का भी विरोध किया गया है।
न्याय तक पहुंच में बाधा का आरोप
वकीलों ने चालान खारिज होने के बाद आगे की न्यायिक रेमेडी चाहने वाले वादकारियों के लिए अनिवार्य रूप से 50 प्रतिशत राशि पहले जमा करने (प्री-डिपॉजिट) की शर्त पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह नियम न्याय तक आम नागरिकों की पहुंच में एक बड़ी बाधा पैदा करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो इतनी बड़ी राशि का इंतजाम करने में असमर्थ हैं। इस पूरी प्रक्रिया को कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्यों के अलगाव के सिद्धांत के खिलाफ भी बताया गया है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की चेतावनी
समिति के महासचिव नरवीर डबास द्वारा हस्ताक्षरित सर्कुलर के अनुसार, इस मामले को पहले भी सरकार के समक्ष उठाया गया था और आश्वासन दिया गया था कि केंद्रीय सरकार से चर्चा किए बिना अधिकारियों को नियुक्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के आधार पर अधिकारियों को अधिसूचित किए जाने की खबरों के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को वकील अदालतों के परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी करेंगे और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

