खानपान की दुनिया में अब केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि भोजन का टेक्सचर और उसका अहसास सबसे बड़ा आकर्षण बनता जा रहा है। हाल ही में मुंबई के पास करजत में एक फार्म हाउस की यात्रा के दौरान यह देखने को मिला कि किस तरह साधारण सी चीजों को भी एक कलात्मक और स्टाइलिश रूप देकर परोसा जा रहा है। डिजाइनर फूड का मुख्य उद्देश्य अब सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि खाने वाले के मुंह में एक खास अनुभव कराना है।
टेक्सचर और दृश्य अनुभव का जादू
जब किसी खाने को खूबसूरती से सजाया जाता है और वह क्रिस्पी या क्रीमी अहसास कराता है, तो खाने का मजे कई गुना बढ़ जाता है। लोग ऐसे व्यंजनों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं जो देखने में भी आकर्षक हों और खाने पर एक अलग अहसास दें। क्रिस्पी स्नैक्स, झाग वाली कॉफी, नट्स वाली आइसक्रीम और जूसी कैंडीज इस नए ट्रेंड का हिस्सा हैं। अब भोजन की गुणवत्ता केवल उसके स्वाद से नहीं, बल्कि इस बात से भी आंकी जाती है कि वह मुंह के अंदर कैसा महसूस होता है।
खानपान का नया इंडस्ट्री ट्रेंड
समूचे खाद्य उद्योग में अब टेक्सचर को एक मुख्य क्वालिटी फीचर माना जाने लगा है। समोसे के टूटने की आवाज हो, पानीपूरी के फूटने का आनंद हो या कुकीज़ से स्टफिंग का बाहर आना, ये सभी अनुभव लोगों को ज्यादा खाने के लिए प्रेरित करते हैं। लोग अक्सर स्वाद के साथ-साथ यह भी याद रखते हैं कि कोई चीज खाते वक्त कैसी महसूस हुई थी।
ATATA फॉर्मूला
खाद्य विक्रेता ग्राहकों को लुभाने के लिए खास फॉर्मूले का उपयोग कर रहे हैं, जिसे ‘ATATA’ कहा जा सकता है। इसमें अट्रैक्शन (आकर्षण), टेक्सचर (नावट), अरोमा (खुशबू), टेस्ट (स्वाद) और आफ्टर टेस्ट (खाने के बाद का वह अहसास या याद जो व्यक्ति अपने साथ घर ले जाता है) शामिल हैं। यही वजह है कि आज का खानपान केवल पेट की भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि एक संपूर्ण संवेदी अनुभव बन चुका है।

