तिब्बत में ग्लेशियर ढहने और नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद वैज्ञानिकों ने पूरे हिमालय क्षेत्र में एक बड़ी आपदा की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और पर्माफ्रोस्ट के अस्थिर होने से भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है। इस पूरे पर्वतीय क्षेत्र में करीब दो अरब लोग निवास करते हैं, जिनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत
विशेषज्ञों ने हिमालयी देशों से अपील की है कि वे साझा पहाड़ों और नदियों की निगरानी को मजबूत करें तथा डेटा साझा करने की व्यवस्था बेहतर बनाएं। रिपोर्टों के अनुसार, इस विशाल क्षेत्र में लगभग 40,000 ग्लेशियर मौजूद हैं, लेकिन इनमें से केवल 21 की ही पर्याप्त रूप से निगरानी हो पा रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र के ग्लेशियर पिछली अवधियों की तुलना में काफी तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक होती जा रही है।
भारत में ग्लेशियल झीलों का खतरा
पर्यावरण सलाहकार संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले भारत में लगभग 200 ग्लेशियल झीलों के किनारों के टूटने का जोखिम बना हुआ है, जिनमें से 56 झीलें अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में आती हैं। उत्तराखंड और सिक्किम जैसे राज्यों में पहले भी ऐसी आपदाएं आ चुकी हैं। दुर्गम भूगोल और अधिक लागत के कारण सभी ग्लेशियरों पर नजर रखना कठिन है, इसलिए वैज्ञानिकों का सुझाव है कि संवेदनशील क्षेत्रों और आबादी वाले स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर निगरानी में रखा जाना चाहिए।

