द्रमुक (DMK) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई में मरीना बीच के पास फोरशोर एस्टेट इलाके में एक नया सचिवालय और विधानसभा परिसर बनाने के टीवीके (TVK) सरकार के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की प्रशासनिक परियोजना किसी घनी आबादी वाले क्षेत्र में मछुआरों की आजीविका और उनके मोहल्ले को नष्ट करके नहीं बनाई जानी चाहिए।
मछुआरों के आंदोलन को पूर्ण समर्थन
एक जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सचिवालय का निर्माण मुख्यमंत्री के कार्य करने के लिए होता है, न कि समुद्र के नज़ारे का आनंद लेने के लिए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी उस क्षेत्र में इस परियोजना का विरोध कर रहे स्थानीय मछुआरों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके विरोध प्रदर्शन को पूरा समर्थन देगी।
सरकारी आदेश वापस लेने की मांग
एमके स्टालिन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भले ही इस परियोजना का समर्थन करने वाले दल इसका विरोध कर रहे हों, लेकिन सरकार ने अभी तक नया सचिवालय भवन बनाने से जुड़ा सरकारी आदेश वापस नहीं लिया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनकी पार्टी इस प्रकार के सरकारी रवैये और अहंकार का डटकर मुकाबला करेगी और इसे आगे नहीं बढ़ने देगी।
पर्यावरण और अन्य दलों की आपत्तियां
इस पूरी योजना को लेकर केवल द्रमुक ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी सवाल उठा रहे हैं। पर्यावरण की संवेदनशीलता और सुभेद्यता को ध्यान में रखते हुए, तथा मछुआरों की आजीविका पर पड़ने वाले गंभीर और प्रतिकूल प्रभावों के कारण मरीना बीच के पास इस निर्माण योजना का विरोध किया जा रहा है। सरकार को बाहर से समर्थन दे रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (M) ने भी बीच के नजदीक इस प्रस्तावित निर्माण योजना के विरोध में प्रदर्शन किया है, क्योंकि इससे स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

