उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र में सेब की फसल की तुड़ाई के बाद पेड़ों की देखभाल का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है, लेकिन बागवानों को सरकारी केंद्रों पर जरूरी कॉपर दवा न मिलने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्यान केंद्रों पर दवा उपलब्ध न होने की वजह से किसानों को मजबूरन बाजार से महंगे दामों पर दवा खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है।
उद्यान केंद्रों पर दवा का अभाव
सेब बागवानों का कहना है कि फसल की कटाई के बाद हर साल पेड़ों पर ब्लाइटॉक्स यानी कॉपर दवा का छिड़काव किया जाना आवश्यक होता है। इस समय किसानों को इस दवा की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन संबंधित उद्यान केंद्रों के पास इसका स्टॉक खत्म हो चुका है। अनुदानित दरों पर मिलने वाली यह दवा समय पर न मिलने से किसानों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, क्योंकि खाद, मजدूरी और परिवहन के खर्चे पहले ही काफी अधिक हैं।
निदेशालय स्तर पर दरें तय होने में देरी
इस पूरे मामले पर विभाग का पक्ष सामने आया है कि मोरी ब्लॉक के लिए लगभग तीस हजार किलो कॉपर दवा की मांग पहले ही भेजी जा चुकी है। हालांकि, निदेशालय स्तर पर दवा के दाम तय न हो पाने के कारण इसकी खरीद प्रक्रिया में रुकावट आ गई है। अधिकारियों की इस प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के कारण किसानों को सही समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बागवानों की मुख्य मांगें
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पेड़ों पर समय पर छिड़काव करना बेहद जरूरी है और वे विभागीय प्रक्रिया के पूरा होने का लंबा इंतजार नहीं कर सकते। इसी मजबूरी के चलते वे बाजार से निजी दुकानों के माध्यम से महंगी दवा खरीदने को विवश हैं। स्थानीय बागवानों ने प्रशासन और उद्यान विभाग से पुरजोर मांग की है कि जल्द से जल्द सभी केंद्रों पर कॉपर दवा की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें अनुदान का वास्तविक लाभ मिल सके।

