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एसआरएचयू में हिमालय के जल और भविष्य पर राष्ट्रीय मंथन, युवाओं की भागीदारी से तलाशेंगे समाधान

देहरादून/डोईवाला। हिमालय की जलधाराएं केवल पहाड़ों की जीवनरेखा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के वर्तमान और भविष्य की उम्मीद भी हैं। इन्हीं जलस्रोतों के संरक्षण, जल एवं स्वच्छता के अधिकार तथा सतत जल शासन की चुनौती पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट में शुक्रवार को राष्ट्रीय स्तर पर मंथन होगा। एसआरएचयू के जल एवं स्वच्छता विभाग (वाटसन) के तत्वावधान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली के सहयोग से एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन विश्वविद्यालय के आदि-कैलाश सभागार में किया जाएगा।

“जल एवं स्वच्छता का अधिकारः हिमालयी क्षेत्र में सुजलाम एवं सतत जल शासन के लिए युवाओं की भागीदारी” विषय पर होने वाले सेमिनार में हिमालयी क्षेत्र के जल संसाधनों के संरक्षण से लेकर जल प्रबंधन, स्वच्छता के अधिकार और टिकाऊ जल शासन तक के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ विचार रखेंगे। विमर्श का केंद्र यह रहेगा कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय और सामाजिक परिदृश्य के बीच हिमालय के जल संसाधनों को किस तरह सुरक्षित रखा जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

एसआरएचयू के वाटसन विभाग के उप-निदेशक नितेश कौशिक ने बताया कि सेमिनार का उद्देश्य युवाओं को जल संरक्षण और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन से जोड़ना है। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में जल संसाधनों के संरक्षण और प्रभावी जल शासन के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी समय की आवश्यकता है।

सेमिनार में युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और जनभागीदारी को जल संरक्षण अभियानों से जोड़ने के तौर-तरीकों पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि स्थानीय स्तर पर युवाओं को सहभागी बनाकर जल संरक्षण की ऐसी व्यवस्था कैसे विकसित की जाए, जिसके परिणाम तात्कालिक होने के साथ-साथ दीर्घकालिक भी हों।

एसआरएचयू का यह राष्ट्रीय सेमिनार पानी को महज प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, अधिकार और भविष्य से जुड़े प्रश्न के रूप में देखने का अवसर प्रदान करेगा।

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