शिक्षा मंत्रालय देश में राष्ट्रीय स्तर की कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) बुनियादी ढांचा रणनीति तैयार करने में जुटा हुआ है। इस पहल का उद्देश्य लोकप्रिय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) को पारंपरिक पेन-एंड-पेपर मोड से डिजिटल या ऑनलाइन माध्यम में सुचारू रूप से स्थानांतरित करना है। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, हालांकि सार्वजनिक परीक्षा प्रणालियों में सुधार के लिए गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कार्य बल समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
ऑनलाइन परीक्षाओं का विस्तार
वर्तमान में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन (JEE-Main), कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG और PG), तथा यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी कई परीक्षाएं पहले से ही कंप्यूटर आधारित माध्यम से आयोजित की जाती हैं। एक बार यह नई बुनियादी ढांचा रणनीति पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, अन्य सभी प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की योजना है।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों पर ध्यान
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य परीक्षण केंद्रों की उपलब्धता से जुड़ी भौगोलिक दूरियों को कम करना, परीक्षा केंद्रों के मानकों को मानकीकृत करना और पेन-एंड-पेपर मोड से डिजिटल माध्यम की तरफ बदलाव को संभव बनाना है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्रामीण इलाकों, महिला उम्मीदवारों और कम कनेक्टिविटी वाले जिलों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। परीक्षा सुधारों से जुड़ी इस व्यवस्था को स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की सहमति के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की कवायद
इस साल की शुरुआत में नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक होने की घटना के बाद देश भर में बड़े पैमाने पर छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए थे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-मुक्त बनाने के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी। इस परीक्षा में हर साल लगभग 25 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं, जिससे यह देश की सबसे बड़ी स्नातक प्रवेश परीक्षा बन जाती है।

