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हर पर्यटन स्थल पर गुलमर्ग जैसी गोंडोला परियोजनाएं नहीं बन सकतीं: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

हर पर्यटन स्थल पर गुलमर्ग जैसी गोंडोला परियोजनाएं नहीं बन सकतीं: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि सरकार हर पर्यटन स्थल पर गुलमर्ग की तरह के केबल कार गोंडोला का निर्माण नहीं कर सकती है। मुख्यमंत्री ने यह बात एक पार्टी विधायक द्वारा दूधपथरी और अन्य स्थानों पर गुलमर्ग गोंडोला जैसी सुविधा की मांग के जवाब में कही। विधायक ने खानसाहिब विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दूधपथरी में इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी थी।

पर्यटन विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि हम हर पर्यटक स्थल को गुलमर्ग नहीं बना सकते और न ही हर जगह गोंडोला का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर पर्यटन स्थल की अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान होती है। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पटनीटॉप में बनी गोंडोला परियोजना को भी गुलमर्ग की तरह भारी मात्रा में ट्रैफिक नहीं मिल पाता है। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि इस तरह की बुनियादी और एक जैसी अधोसंरचना को सभी अन्य स्थलों पर दोहराने के विचारों से बचना आवश्यक है क्योंकि हर जगह की भौगोलिक और पर्यटक मांग अलग होती है।

बिजली बिलों की माफी और एमनेस्टी योजना पर मुख्यमंत्री का रुख

विधानसभा सत्र के दौरान बिजली बिलों से जुड़ी एमनेस्टी योजना के विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक द्वारा इस संबंध में सवाल उठाने पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि बिजली बिलों में एमनेस्टी योजना को हमेशा के लिए और बार-बार नहीं बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बार-बार बिल माफी योजना देने से उन ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ सीधे तौर पर अन्याय होता है जो नियमित रूप से और समय पर अपने बिजली बिलों का भुगतान करते हैं। इसके अलावा, इस तरह की बार-बार मिलने वाली छूट से उपभोक्ताओं को यह प्रोत्साहन मिलता है कि वे समय पर बिल न चुकाएं और अगली एमनेस्टी योजना का इंतजार करते रहें। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपनी बात समाप्त करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि सरकार समाज के कमजोर वर्गों के लिए इस तरह की राहत या माफी के विषय पर विचार कर सकती है, लेकिन हर बार बड़े पैमाने पर व्यापक और अनियंत्रित माफी देना सरकार के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

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