एसआईआर और वोट चोरी के विवाद के बीच विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने के बजाय अब जनता के बीच जाकर जमीनी स्तर पर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। संसद में बहुमत के आंकड़े पक्ष में न होने के कारण विपक्ष ने अपनी रणनीति में यह बदलाव किया है। हालांकि, कानूनी दायरे में घेरने के लिए विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की आईटी डिविजन की महानिदेशक सीमा खन्ना के खिलाफ देश भर में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं।
संसदीय आंकड़ों और कानूनी अड़चनों का असर
वरिष्ठ कानूनविद कपिल सिब्बल ने बैठक में बताया कि वर्ष 2023 में बनाए गए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी से सुरक्षा कवच प्राप्त है। इसके अलावा, संसद में बहुमत का आंकड़ा पक्ष में न होने और सभापति व स्पीकर के रुख को देखते हुए महाभियोग प्रस्ताव में कई अड़चने हैं। इसी वजह से विपक्ष ने संसद के बजाय राजनीतिक आंदोलन और जनता के बीच जाने को ज्यादा तवज्जो देने का निर्णय लिया है, जिस पर बैठक में व्यापक सहमति बनी।
INDIA गठबंधन में बेहतर समन्वय पर जोर
बैठक के दौरान राजनीतिक समन्वय और संवाद को बेहतर बनाने के लिए एक उपसमिति के गठन का सुझाव भी सामने आया। विपक्षी नेताओं का मानना था कि शीर्ष स्तर की बैठकें लंबे अंतराल पर होती हैं, इसलिए अहम मुद्दों पर संयुक्त दृष्टिकोण और त्वरित तालमेल के लिए एक छोटा उपसमूह और प्रवक्ता होना चाहिए। इस पर अधिकांश नेताओं ने सहमति व्यक्त की।
विभिन्न नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे
चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने वोट चोरी और दक्षिण कोलकाता में चुनाव के बाद सरकारी भवन में ईवीएम जलने के मामले का जिक्र किया। वहीं, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा वेंडर को दिए गए ठेकों की गहन जांच की मांग उठाई। उद्धव ठाकरे और अन्य वामपंथी दलों के नेताओं ने भी चुनाव प्रक्रिया और आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए, तथा इस संघर्ष में नागरिकों व सिविल सोसाइटी को साथ जोड़ने पर बल दिया।

