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नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने यूपीआई लेनदेन को मुफ्त रखने की वकालत की

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने यूपीआई लेनदेन को मुफ्त रखने की वकालत की

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को सुझाव दिया है कि यूपीआई लेनदेन की सुविधा को बिना किसी फीस के कुछ और वर्षों तक जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक करेंसी-टू-जीडीपी अनुपात में कमी के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक इस व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

पब्लिक गुड के रूप में देखें यूपीआई

राजीव कुमार ने कहा कि किसी भी लेनदेन मूल्य के लिए यूपीआई के इस्तेमाल पर व्यापारियों से किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जानी चाहिए। सरकार को इस डिजिटल व्यवस्था को बड़े पैमाने पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली एक जन-हित सेवा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए सरकारी खजाने पर आने वाले खर्च की तुलना में इसके कुल लाभ काफी अधिक हैं।

लेनदेन शुल्क और सरकारी रुख

सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से व्यापारियों के लिए 2000 रुपये से अधिक के ट्रांसफर पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के ऐलान के बाद से चर्चाएं तेज हुई हैं। हालांकि, वित्त मंत्रालय स्पष्ट कर चुका है कि ग्राहकों को यूपीआई के जरिए भुगतान करते समय कोई शुल्क नहीं देना होगा और यह मर्चेंट इकोसिस्टम के भीतर का चार्ज है। रोजमर्रा के छोटे भुगतान और पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखे गए हैं।

विभिन्न सेक्टरों के लिए नियम

नए नियमों के तहत 2000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया गया है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि से जुड़े सामान जैसे कम मार्जिन वाले और जरूरी क्षेत्रों के लिए इस पर एक तय शुल्क निर्धारित किया गया है। इस विषय पर राजनीतिक दलों के बीच भी बयानबाजी देखने को मिली है।

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