सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को सख्त और समयबद्ध कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि केवल चिंता व्यक्त करने के बजाय जमीन पर ठोस और प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए।
विशेष टीमों का होगा गठन और सर्वे
न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, दिल्ली के पुलिस आयुक्त प्रत्येक पुलिस जिले के लिए विशेष टीमों का गठन करेंगे। इन टीमों का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा। ये विशेष दल अपने-अपने क्षेत्रों के सुनसान इलाकों, पार्कों, बाजारों, परिवहन केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के सार्वजनिक स्थानों का निरीक्षण करेंगे। यह पूरा सर्वेक्षण अपराध के आंकड़ों, खुफिया जानकारी और पिछली घटनाओं के आधार पर किया जाएगा ताकि जोखिम वाले स्थानों की सटीक पहचान हो सके।
गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी दुरुस्त करने के आदेश
अदालत ने सभी संवेदनशील क्षेत्रों और सार्वजनिक पार्कों में पुलिस गश्त हर समय सुनिश्चित करने को कहा है, विशेषकर सुबह और शाम के समय। इसके साथ ही, सार्वजनिक स्थानों, मेट्रो स्टेशनों, बस स्टॉप और रेलवे स्टेशनों के आसपास लाइटिंग और सीसीटीवी कैमरों का ऑडिट करने के आदेश दिए गए हैं। खराब पड़ी स्ट्रीट लाइट्स और कैमरों को तुरंत ठीक किया जाएगा तथा जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त कैमरे भी लगाए जाएंगे।
वाहनों के शीशों और न्यायिक प्रक्रिया पर सख्ती
शीर्ष अदालत ने वाहनों पर काले टिंटेड शीशों या सोलर कंट्रोल फिल्मों के इस्तेमाल के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। नियमों का पालन न करने वाले वाहनों को जब्त किया जाएगा और अवैध फिल्मों को हटाया जाएगा। इसके अलावा, दिल्ली उच्च न्यायालय से फास्ट ट्रैक अदालतों और पोक्सो मामलों की स्थिति की जानकारी मांगी गई है तथा इन मामलों की सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी करने का प्रयास करने को कहा गया है।

