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अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राजस्थान में वन अधिकारी की मौत पर स्वतः संज्ञान

अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राजस्थान में वन अधिकारी की मौत पर स्वतः संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में अवैध खनन रोकने के दौरान एक वन अधिकारी की हुई मौत के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में निवारक हिरासत अनिवार्य होनी चाहिए। शीर्ष अदालत इस मामले पर आगामी छह अक्टूबर को आगे की सुनवाई करेगी।

घटना की पृष्ठभूमि

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना सोमवार देर रात छोटी सादड़ी वन क्षेत्र में हुई थी। अवैध खनन की सूचना मिलने पर वन रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत और एक वन रक्षक मौके पर पहुंचे थे। जब अधिकारी ने मिट्टी ले जा रहे एक डंपर को रोकने का प्रयास किया, तो चालक ने कथित तौर पर वाहन से उन्हें टक्कर मार दी और उनकी मोटरसाइकिल को कई मीटर तक घसीटते हुए मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल अधिकारी को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

अदालत की टिप्पणियां और निर्देश

यह मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष एक लंबित स्वतः संज्ञान मामले के दौरान उठाया गया था। पीठ ने राजस्थान की ओर से पेश हुए वकील से इस मामले में तैयारी के साथ जवाब देने को कहा है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की है कि इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त निवारक हिरासत के आदेश दिए जाने चाहिए।

पूर्व के निर्देश और पर्यावरणीय सुरक्षा

इससे पहले भी शीर्ष अदालत ने नेशनल चंबल सेंचुरी और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेत खनन को लेकर कड़े निर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे लोगों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। साथ ही, अदालत ने संबंधित राज्यों को वन विभागों में खाली पड़े पदों को भरने और मैदानी स्तर पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के भी निर्देश दिए थे ताकि अवैध खनन के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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