उत्तराखंड के कृषि और उद्यान विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में खरीद, अनुदान, भुगतान और सरकारी राजस्व के मामलों को लेकर किसान मंच ने सरकार और विभाग के शीर्ष स्तर को खुली चुनौती दी है। संगठन का दावा है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज और अभिलेख मौजूद हैं जो बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों की ओर इशारा करते हैं।
खरीद और अनुदान योजनाओं पर गंभीर सवाल
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने कहा है कि विभाग की योजनाओं में बीज एवं सामग्री खरीद, अनुदान वितरण, लाभार्थी चयन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), फर्मों को भुगतान और गुणवत्ता परीक्षण जैसे तमाम बिंदुओं पर व्यापक जांच की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों को आधिकारिक दस्तावेजों के साथ सामने आने की चुनौती दी है।
स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग
संगठन का अनुमान है कि विभिन्न प्रकरणों में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी और राजस्व चोरी हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी या अदालत द्वारा नहीं की गई है। किसान मंच ने मांग की है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कृषि मंत्री गणेश जोशी इस मामले में विभागीय स्तर से ऊपर उठकर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कमेटी गठित करें, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
दस्तावेजों के साथ बहस की पेशकश
कार्तिक उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी मंच पर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसानों के नाम पर खर्च किए गए धन का वास्तविक हिसाब क्या है। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जवाबदेही तय करना है।

