वीकेंड या छुट्टी के दिन किसी अप्रत्याशित बात या दफ्तर के काम के कारण मूड खराब होना एक आम बात है। कई बार छोटी-छोटी स्थितियां हमारे पूरे सप्ताहांत को तनावपूर्ण बना देती हैं, जिससे आने वाले सप्ताह की शुरुआत भी थकान के साथ होती है।
क्या है टीआईएम (थॉट-इन्फ्लुएंस्ड माइंडसेट)?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी कोई अप्रिय घटना घटती है या बॉस की तरफ से कोई गंभीर बात कही जाती है, तो हम अपने मन में एक काल्पनिक कहानी बुनना शुरू कर देते हैं। यह प्रक्रिया ही ‘टीआईएम’ यानी थॉट-इन्फ्लुएंस्ड माइंडसेट कहलाती है। असल स्थिति चाहे सामान्य हो, लेकिन हमारा दिमाग उसके आसपास कई तरह की नकारात्मक आशंकाएं खुद ही पैदा कर लेता है।
घटना और कल्पना में अंतर समझना जरूरी
दफ्तर में या निजी जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जिनका हम अपने स्तर पर गलत अर्थ निकाल लेते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई बॉस कोई बात कहकर जल्दी में निकल जाए, तो कर्मचारी अक्सर खुद को उसका जिम्मेदार मानने लगते हैं। इसके विपरीत, वास्तविकता कई बार पूरी तरह अलग होती है और हमारे विचारों का उस सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं होता।
- मन में खुद से नकारात्मक कहानियां न बनाएं।
- तथ्यों का सीधे तौर पर सामना करें, ना कि कयास लगाएं।
- घटनाओं को अपने अवकाश या मानसिक शांति पर हावी न होने दें।
फंडा सीधा है कि जब भी कोई स्थिति बने, तो मन को उसका मनगढ़ंत अर्थ तय करने की अनुमति न दें। तथ्यों को वास्तविकता के रूप में स्वीकार करने से मानसिक तनाव से बचा जा सकता है और वीकेंड का पूरा आनंद लिया जा सकता है।

