दिल्ली के 31 वर्षीय रियल एस्टेट व्यवसायी युवराज सिंह मंडाना की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। उनकी हत्या कथित तौर पर करोड़ों रुपये के वित्तीय विवाद के चलते की गई थी, जिसके बाद पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
शादी की खुशियां मातम में बदलीं
युवराज की शादी महज एक महीने बाद होनी थी और परिवार में तैयारियां जोरों पर थीं। घटना वाले दिन उन्होंने परिवार के साथ लाजपत नगर में जाकर अपनी शादी के लिए शेरवानी फाइनल की थी। इसके बाद वह एक पूर्व महिला सहकर्मी से मिलने की बात कहकर निकले थे। परिवार के अनुसार, इसके बाद युवराज से सीधा संपर्क टूट गया और केवल संदेश मिलने लगे, जिसमें कहा गया था कि वह ठीक हैं और जल्द लौट आएंगे।
पुलिस जांच और गिरफ्तारियां
परिजनों द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद दिल्ली पुलिस ने तकनीकी निगरानी के आधार पर उनकी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उनके पति संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर कबूल किया कि उन्होंने युवराज की हत्या कर दी थी और शव को गुरुग्राम के एक नाले में फेंक दिया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन दोनों और युवराज के बीच करोड़ों रुपये का वित्तीय विवाद चल रहा था।
परिवार ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
युवराज के परिवार ने गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को ही एक अज्ञात शव बरामद कर लिया था, लेकिन उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी गई और 14 सितंबर को बिना उनकी जानकारी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि उन्हें इस बारे में तब पता चला जब दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
आगे की कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, हत्या के सही तरीकों और अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

