प्रवासी पक्षियों की श्रेणी में आने वाले दो जियो टैग अमूर फाल्कन, जिन्हें ‘अपापांग’ और ‘अलांग’ नाम दिया गया है, अपनी लंबी वैश्विक यात्रा पूरी करके मणिपुर वापस लौट आए हैं। बाज परिवार से ताल्लुक रखने वाले इन पक्षियों ने अपने प्रवास के दौरान एशिया और अफ्रीका के कई देशों का लंबा सफर तय किया है। इनकी इस अद्भुत यात्रा ने एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है।
साल भर की लंबी यात्रा और वैज्ञानिक ट्रैकिंग
नवंबर 2025 में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों द्वारा इन दोनों पक्षियों को विशेष रूप से जियो टैग किया गया था। उत्तर-पूर्वी चीन में अपने प्रजनन स्थलों से अपनी वापसी यात्रा शुरू करने के बाद ये पक्षी गुरुवार को मणिपुर पहुंचे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, इन पक्षियों ने अपने प्रजनन स्थलों से अपनी वापसी यात्रा निर्धारित समय से ग्यारह दिन पहले ही शुरू कर दी थी। इन दोनों पक्षियों की लगभग साल भर चली लंबी ट्रैकिंग अब सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। अपने इस पूरे प्रवास के दौरान ‘अपापांग’ और ‘अलांग’ ने एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के कुल 23 देशों की सीमाओं को पार किया, जिसके चलते इन्हें एक तरह से वैश्विक नागरिक भी माना जा रहा है।
तामेंगलोंग जिले में ठहराव और स्थानीय लोगों का विशेष सहयोग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन प्रवासी पक्षियों के मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ चुनिंदा जगहों पर दो से तीन हफ्ते तक रुकने की पूरी उम्मीद है। स्थानीय निवासी हर साल इन विशेष मेहमान पक्षियों के आगमन का बहुत ही बेसब्री के साथ इंतजार करते हैं। इसके साथ ही, स्थानीय लोग इन प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी खुद संभालते हैं और उनकी पूरी देखभाल करते हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

