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विकसित भारत के लक्ष्य में बिहार की अहम भूमिका और आर्थिक संभावनाओं पर एक नजर

विकसित भारत के लक्ष्य में बिहार की अहम भूमिका और आर्थिक संभावनाओं पर एक नजर

जब देश वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, तब तेरह करोड़ की आबादी वाले बिहार की इसमें बड़ी भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। जब तक देश का पूर्वी क्षेत्र आर्थिक उत्पादन, नए विचारों और औद्योगिक विकास का मजबूत केंद्र नहीं बनेगा, तब तक विकसित भारत का यह सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकता। हालांकि, अब इस क्षेत्र का आर्थिक परिदृश्य पुराने नकारात्मक विचारों से बाहर निकलकर आगे बढ़ रहा है।

आर्थिक वृद्धि और गरीबी में आई कमी

वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य की जीएसडीपी वृद्धि दर स्थिर मूल्यों पर 8.6 प्रतिशत और वर्तमान मूल्यों पर 13.1 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसके अलावा, राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार राज्य में गरीबी का स्तर पहले के मुकाबले काफी कम हुआ है, जिसे देश में सबसे तेज गति से होने वाले सुधारों में गिना जाता है। ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र को अतीत के विभिन्न नीतिगत और संरचनात्मक आघातों का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण औद्योगिकीकरण और कृषि व्यवस्था पर असर पड़ा था।

युवा शक्ति और रिवर्स ब्रेन गेन की संभावना

वर्तमान में राज्य की आधी से अधिक आबादी पच्चीस वर्ष से कम आयु की है और विभिन्न प्रशासनिक व अन्य क्षेत्रों में यहाँ की प्रतिभा का लोहा माना जाता है। इस बौद्धिक पलायन को रोकने और उसे रिवर्स ब्रेन गेन में बदलने के लिए स्थानीय स्तर पर उपयुक्त माहौल तैयार करने की जरूरत है। गंगा नदी पर बना राष्ट्रीय जलमार्ग-1 इस क्षेत्र को सीधे वैश्विक समुद्री व्यापार से जोड़ने का काम करता है। इसके अलावा, प्रस्तावित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क इस क्षेत्र को व्यापारिक प्रवेश द्वार के रूप में विकसित कर सकते हैं। मखाना, लीची, मक्का और केला जैसे कृषि उत्पादों के लिए मेगा फूड पार्क किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

भविष्य की चरणबद्ध कार्ययोजना

इस आर्थिक कायापलट के लिए एक तयशुदा और चरणबद्ध राष्ट्रीय कार्ययोजना की आवश्यकता है। पहले चरण में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और वित्तीय व्यवस्था पर ध्यान देना होगा, जबकि अगले चरणों में विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर देना जरूरी है ताकि राज्य की पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके।

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