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प्रधानमंत्री पर टिप्पणी को लेकर भाजपा का देशव्यापी प्रदर्शन, खरगे से माफी की मांग

प्रधानमंत्री पर टिप्पणी को लेकर भाजपा का देशव्यापी प्रदर्शन, खरगे से माफी की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए एक विवादित बयान के विरोध में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश के विभिन्न राज्यों और महानगरों में जोरदार प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुख्यालयों पर एकत्र होकर अपना आक्रोश जताया और कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान को पूरी तरह से अशोभनीय व अपमानजनक करार दिया।

विवाद की शुरुआत और देशव्यापी विरोध

यह पूरा सियासी विवाद रविवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जब मंच से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में घमासान मच गया। इसके विरोध में सोमवार को बिहार की राजधानी पटना, कर्नाटक के बेंगलुरु, जम्मू, दिल्ली, मुंबई, रांची, कोलकाता और लखनऊ समेत कई प्रमुख शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। पटना में कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंका, तो वहीं बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बिना शर्त माफी की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।

दिग्गज नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बयान पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर की गई ऐसी टिप्पणी बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली है। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान किसी आम कार्यकर्ता का नहीं बल्कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता भी सार्वजनिक जीवन से दूर जा चुके दिवंगत माता-पिता का नाम लेकर राजनीतिक मर्यादाओं को लांघ रहे हैं।

कांग्रेस और सहयोगियों का पलटवार

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने भाजपा के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर तीखा पलटवार किया है। मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि भाजपा अनावश्यक मुद्दों को तूल दे रही है और उन्हें किसी से संस्कृति सीखने की आवश्यकता नहीं है। वहीं, राजद सांसद मनोज झा ने भी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध सिलेक्टिव नहीं होना चाहिए और अतीत में विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी इस तरह की टिप्पणियां की जा चुकी हैं।

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