भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष की कुछ ताकतों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इन ताकतों का मुख्य उद्देश्य वैध सार्वजनिक मांगों की आड़ में हिंसा और साजिश के माध्यम से सत्ता में बदलाव लाना है। प्रधानमंत्री के विजयादशमी संबोधन का हवाला देते हुए उन्होंने समाज में विभाजन पैदा करने और धर्म के प्रति नफरत फैलाने के एजेंडे पर भी बात की।
तीन मुख्य एजेंडे और संस्थाओं पर सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री के विजयादशमी संदेश का जिक्र करते हुए बताया कि कुछ समूह मुख्य रूप से तीन एजेंडों पर काम कर रहे हैं। इनमें निजी लाभ के लिए सत्ता का उपयोग करना, समाज में बंटवारा पैदा करना और भारतीय संस्कृति व धर्म के प्रति नकारात्मक भावनाएं रखना शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये ताकतें देश की प्रमुख संस्थाओं जैसे एलआईसी (LIC), एचएएल (HAL), एसबीआई (SBI) और सेबी (SEBI) के अलावा वैक्सीन, ईवीएम (EVM) और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रही हैं और भ्रामक बातें फैला रही हैं।
रावण के दस सिरों से की गई तुलना
बीजेपी सांसद ने इन समूहों द्वारा बार-बार उठाई जाने वाली मांगों की तुलना पौराणिक कथा के पात्र रावण के दस सिरों से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह रावण का एक सिर कटने पर दूसरा सिर तुरंत सामने आ जाता है, उसी प्रकार इनकी एक मांग पूरी होने पर तुरंत दूसरी नई मांग खड़ी हो जाती है। अलग-अलग आंदोलनों में एक जैसी भाषा के इस्तेमाल से इनके छिपे हुए एजेंडे को पहचाना जा सकता है।
छद्म वेष और असली इरादे
अपने संबोधन में रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता सीता के अपहरण से पहले रावण ने साधु का रूप धारण किया था, ठीक उसी तरह आज भी कई ताकतें भेष बदलकर काम कर रही हैं। उनका असली मकसद सामने रखी गई मांगें नहीं, बल्कि गहरी साजिश और हिंसा के जरिए सत्ता हासिल करना है।

