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बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे में एमपीएससी प्रदर्शनों पर जताई नाराजगी, सरकार से मांगा रोडमैप

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे में एमपीएससी प्रदर्शनों पर जताई नाराजगी, सरकार से मांगा रोडमैप

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) परीक्षाओं से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे प्रदर्शनों पर गहरी नाराजगी जताई और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि छात्र असामाजिक तत्व नहीं हैं और वे किसी वजह के बिना प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को तीन हफ्ते के भीतर पूरी भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया पर एक ठोस रोडमैप पेश करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई 25 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।

सरकार से जवाब तलब और छात्रों को सलाह

अदालत ने कहा कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कोई अनियमितता या कुप्रबंधन हुआ है, तो छात्रों को लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह छात्रों के बीच भरोसे का माहौल बनाए रखे और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करे। साथ ही, अदालत ने प्रदर्शनकारी छात्रों से अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और आंदोलन रोकने की अपील की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छात्रों का मुख्य काम पढ़ाई करना है, न कि सड़कों पर प्रदर्शन करना।

राज्य सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। इन मांगों में 70,000 रिक्तियों को भरना, परीक्षा शुल्क को सौ रुपये तक सीमित करना और ऑफ़लाइन मोड में परीक्षा आयोजित करना शामिल है। इसके अलावा, एमपीसी अध्यक्ष के इस्तीफे से जुड़ी सिफारिश को आगे बढ़ाने और कुप्रबंधन की जांच के लिए एक समिति के गठन की जानकारी भी अदालत को दी गई। महाधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि पुणे पुलिस ने छात्रों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया है ताकि उनके भविष्य पर कोई आंच न आए।

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