अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में कई बार ऐसे शब्द लिखे होते हैं जो सुनने में डरावने लग सकते हैं, और ‘बल्की यूट्रेस’ (Bulky Uterus) भी उनमें से एक है। इस शब्द को देखकर अक्सर मन में यह सवाल आता है कि क्या यह कोई गंभीर समस्या है या इससे गर्भधारण पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, बल्की यूट्रेस अपने आप में कोई बीमारी या अंतिम निदान नहीं है, बल्कि यह केवल इस बात का वर्णन है कि गर्भाशय का आकार महिला की उम्र और प्रजनन अवस्था के हिसाब से सामान्य से बड़ा है।
बल्की यूट्रेस के मुख्य कारण
गर्भाशय का आकार बढ़ने के पीछे कई वजह हो सकती हैं। इसमें सबसे आम कारण एडेनोमायोसिस (Adenomyosis) और फाइब्रॉड्स (Fibroids) हैं। एडेनोमायोसिस वह स्थिति है जिसमें गर्भाशय की परत उसकी मांसपेशियों की दीवार में बढ़ने लगती है, जिससे यूट्रेस मोटा और बड़ा हो जाता है। वहीं, फाइब्रॉड्स सौम्य यानी गैर-कैंसरयुक्त गांठे होती हैं जो गर्भाशय की मांसपेशियों की परत से विकसित होती हैं। हालांकि, रिपोर्ट में बल्की यूट्रेस दिखने का मतलब यह नहीं है कि महिला को फाइब्रॉड्स ही हैं। इसके लिए लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री को समझना जरूरी होता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान भी गर्भाशय का आकार प्राकृतिक रूप से बड़ा हो जाता है।
इसके सामान्य लक्षण क्या हैं?
बल्की यूट्रेस से पीड़ित हर महिला में लक्षण दिखाई दें ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार यह स्थिति किसी अन्य कारण से कराए गए अल्ट्रासाउंड के दौरान सामने आती है। जब लक्षण महसूस होते हैं, तो उनमें ये शामिल हो सकते हैं:
- मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक या लंबे समय तक ब्लीडिंग होना
- दर्दनाक माहवारी या पेल्विक क्षेत्र में भारीपन महसूस होना
- पेट में असुविधा या संभोग के दौरान दर्द होना
- मूत्राशय या आंतों पर दबाव महसूस होना
बहुत अधिक ब्लीडिंग होने के कारण शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या भी हो सकती है, जिससे अत्यधिक थकान महसूस होती है।
क्या यह फर्टिटी को प्रभावित करता है?
यह एक आम भ्रम है कि बल्की यूट्रेस होने पर महिला कभी मां नहीं बन सकती। प्रजनन क्षमता पर इसका प्रभाव पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि यूट्रेस के बड़े होने की असली वजह क्या है। एडेनोमायोसिस या कुछ खास प्रकार के फाइब्रॉड्स गर्भधारण में कठिनाई पैदा कर सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं स्वस्थ गर्भधारण करती हैं।
जांच और उपचार की प्रक्रिया
इस स्थिति की जांच के लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल और menstrual हिस्ट्री की समीक्षा करते हैं और पेल्विक अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। जरूरत पड़ने पर एमआरआई (MRI) भी कराया जा सकता है। हर बल्की यूट्रेस के लिए सर्जरी या इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। यदि कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो केवल निगरानी रखी जाती है। दर्द या भारी ब्लीडिंग होने पर दवाइयों या हॉर्मोनल ट्रीटमेंट से मदद ली जाती है। इसलिए रिपोर्ट में यह शब्द देखकर घबराने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर सही कारण का पता लगाना चाहिए।

