राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के निर्देशों के बाद दवा कंपनियों ने कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली सैकड़ों दवाओं और उनके फॉर्मूलेशन के दाम में भारी कटौती की है। इस फैसले से देशभर के गंभीर मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) नौ नवंबर से लागू होंगे।
ट्रेड मार्जिन ढांचे के तहत हुआ बदलाव
दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने वाली संस्था एनपीपीए द्वारा ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (टीएमआर) ढांचे के तहत यह कदम उठाया गया है। इस प्रक्रिया के तहत कई ऐसी कैंसर दवाओं की एमआरपी फिर से निर्धारित की गई है, जिन पर पहले सरकार की ओर से कोई अधिकतम मूल्य सीमा तय नहीं की गई थी। इस बड़ी कटौती के बाद कुछ चुनिंदा दवाओं के दाम में 90 प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
प्रमुख दवाओं के घटे दाम
आंकड़ों के अनुसार, रुपयों के हिसाब से सबसे बड़ी कटौती थियोटेपा नामक कीमोथेरेपी इंजेक्शन में देखने को मिली है, जिसका उपयोग ब्लैडर कैंसर के इलाज और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से पहले किया जाता है। इसकी एक शीशी की कीमत में भारी कमी आई है। वहीं, प्रतिशत के आधार पर सबसे बड़ी गिरावट स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा पाल्बोसाइक्लिब में दर्ज की गई है, जिसके पैक की कीमत अब काफी कम हो गई है।
मरीजों को होगी करोड़ों की बचत
प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक, दवाओं के दाम कम होने से मरीजों की जेब से खर्च होने वाली राशि में सालाना 2,500 करोड़ रुपये से 3,500 करोड़ रुपये तक की भारी बचत होगी। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि दवाओं के सस्ते होने के साथ-साथ अस्पतालों में अन्य जांच, परामर्श शुल्क और इलाज से जुड़े विविध शुल्कों पर भी नजर रखना जरूरी होगा ताकि मरीजों को समग्र राहत मिल सके।

