केंद्र सरकार ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों की क्रीमी लेयर स्थिति तय करने वाले सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले के बाद पैदा हुई व्यावहारिक कठिनाइयों पर शीर्ष अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रही है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा अनुशंसित 958 उम्मीदवारों को सेवा आबंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अदालत से निर्देश मांगे हैं। यह स्थिति ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में आए फैसले के बाद उत्पन्न हुई है।
क्रीमी लेयर निर्धारण और फैसले का प्रभाव
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया था कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की स्थिति केवल माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं की जा सकती है। इसके अलावा, निजी संस्थाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों से अलग मानना भेदभावपूर्ण हो सकता है। इस फैसले के बाद DoPT ने सेवा और कैडर आबंटन, वरिष्ठता, पिछली भर्तियों और आरक्षण नीति पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया।
परीक्षा परिणाम और सेवा आबंटन की स्थिति
CSE-2025 के नतीजे 11 मार्च के फैसले से पांच दिन पहले यानी 6 मार्च को घोषित किए गए थे। चूंकि उस समय सेवा आबंटन को अंतिम रूप नहीं दिया गया था, इसलिए विभाग ने 24 अगस्त को एक विविध आवेदन दायर कर अदालत से इस मामले में स्पष्टीकरण और निर्देश मांगे। सूत्रों के अनुसार, सभी प्रशिक्षण संस्थान और विभाग परीक्षा के उम्मीदवारों को सेवा आबंटन देने और फाउंडेशन कोर्स शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पाठ्यक्रम शुरू होने में देरी से उम्मीदवारों की वरिष्ठता या सेवा शर्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भविष्य की चिंताएं और कानूनी पहलू
- फैसले के क्रियान्वयन से देश भर में अन्य पिछड़ा वर्ग की आरक्षण नीति और अन्य सरकारी विभागों की भर्तियों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
- वेतन जैसे मापदंडों के अभाव में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बच्चों की क्रीमी लेयर पहचान को लेकर संवैधानिक समानता के उल्लंघन जैसी चिंताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- पूर्व की भर्तियों, रेलवे, बैंकिंग और अन्य चयन आयोगों द्वारा की गई नियुक्तियों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
- वर्तमान में सेवारत अधिकारियों की वरिष्ठता और ग्रेडेशन पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
सरकार और संबंधित मंत्रालयों द्वारा इस मामले का समग्र परीक्षण किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगी से बचा जा सके।

