छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत आने वाले भटगांव में एक अनूठी और बड़ी घटना सामने आई है, जहां पत्नी की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर उत्पन्न हुए गतिरोध के कारण एक व्यक्ति ने अपने पुराने धर्म में लौटने का फैसला किया। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर काफी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अंतिम संस्कार को लेकर हुआ था विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेश ध्रुव की पत्नी सरस्वती ध्रुव की बीमारी के बाद मौत हो गई थी। सुरेश ने कुछ समय पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। जब उनकी पत्नी का निधन हुआ, तो स्थानीय हिंदू समुदाय के सदस्यों ने उनके शव का अंतिम संस्कार हिंदू परंपराओं के अनुसार करने से मना कर दिया, क्योंकि सुरेश ने अपना धर्म बदल लिया था।
बैठक के बाद हुई वापसी की प्रक्रिया
मामला बढ़ने के बाद गांव में एक बैठक बुलाई गई, जो करीब एक घंटे तक चली। इस स्थिति में हस्तक्षेप करने के लिए विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पूर्व जिला अध्यक्ष संदीप अग्रवाल को बुलाया गया। बैठक के दौरान सुरेश ध्रुव से अपने पुराने धर्म और परंपराओं को अपनाने का आग्रह किया गया।
सुरेश ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद शुद्धि प्रक्रिया के तहत उन्हें गंगाजल दिया गया और हिंदू देवी-देवताओं की प्रार्थना कराई गई। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें पुनः हिंदू समुदाय में शामिल कर लिया गया, जिसके बाद मृतक महिला का अंतिम संस्कार सनातन रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ।
व्यक्ति का बयान
सुरेश ध्रुव ने मीडिया को बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले स्वेच्छा से ईसाई धर्म अपनाया था, लेकिन अब वह अपनी मर्जी से अपने मूल धर्म और समाज में वापस लौट आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में समाज की परंपराओं और नियमों का पूरी तरह पालन करेंगे।
दूसरी ओर, संदीप अग्रवाल ने बताया कि उन्हें भटगांव में महिला की मृत्यु और अंतिम संस्कार को लेकर उपजे विवाद की सूचना मिली थी, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर बातचीत की गई। सुरेश की सहमति के बाद सभी आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए और शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

