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उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस की बदलती रणनीति, ब्राह्मण चेहरे पर दांव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस की बदलती रणनीति, ब्राह्मण चेहरे पर दांव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस पार्टी अपनी रणनीतिक दिशा में बदलाव करती नजर आ रही है। पार्टी ने एक साहसिक कदम उठाते हुए ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखने वाली आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले के जरिए पार्टी का मुख्य उद्देश्य उस वर्ग को अपने पाले में लाना है, जो लंबे समय से भाजपा का मजबूत समर्थक माना जाता रहा है।

पुराने राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने अपने अस्तित्व को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है। पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी का वोट प्रतिशत काफी कम रहा था। ऐसे में भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने का यह निर्णय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर के सफल सामाजिक समीकरण यानी ब्राह्मण, दलित और अल्पसंख्यक (BDA) गठजोड़ को दोबारा जीवित करने का प्रयास कर रही है।

नए संगठनात्मक ढांचे में दिखा संतुलन

कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए नए पदाधिकारियों में जातीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश दिखाई देती है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण चेहरे के अलावा, कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में मुस्लिम समुदाय से आने वाले इमरान मसूद को जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष पदों पर दलित समुदाय (पासी) के आलोक प्रसाद और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के देविंदर निषाद को शामिल किया गया है। इन सभी नियुक्तियों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की छाप साफ तौर पर देखी जा रही है।

आगामी चुनावों की तैयारी और गठबंधन

राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर विपक्षी दलों की सक्रियता तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चाएं हैं। वर्ष 2027 के चुनाव परिणाम आगामी राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी काफी अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस अपने पुराने सामाजिक समीकरणों को टटोल रही है, वहीं राज्य में राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं।

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