कटक में दुर्गा पूजा का उत्सव बेहद अनूठे और भव्य तरीके से मनाया जाता है, जहां देवी दुर्गा को एक बेटी के रूप में उनके मायके लौटने पर सम्मानित किया जाता है। इस दौरान शहर की विभिन्न पूजा समितियों द्वारा मां का स्वागत अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाता है।
बेटी के रूप में मां दुर्गा का स्वागत
कटक के निवासियों के लिए देवी दुर्गा केवल एक आराध्य देव नहीं हैं, बल्कि वह हर परिवार और समिति के लिए एक बेटी की तरह हैं। दशहरे के पावन अवसर पर जब यह ‘बेटी’ अपने घर लौटती है, तो आयोजक अपनी क्षमता के अनुसार उनका भव्य स्वागत करते हैं। इस परंपरा के तहत शहर के कई मंडपों में मां को कीमती गहनों से सजाया जाता है।
करोड़ों के सोने और चांदी के आभूषण
शहर के अलग-अलग मंडपों में देवी को सजाने के लिए उपयोग किए जाने वाले सोने और चांदी के गहनों का कुल मूल्य भारी-भरकम है। इस वर्ष विभिन्न मंडपों में लगभग 70 किलोग्राम सोना और 120 क्विंटल से अधिक चांदी का उपयोग किया गया है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक है। इन बहुमूल्य आभूषणों को पंचमी से लेकर दशमी तक सभी पांच दिनों के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन पर रखा जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।
अनोखी सुरक्षा और जनसहयोग
इतनी बड़ी मात्रा में सोने और चांदी के प्रदर्शन के बावजूद, समितियों का कहना है कि सुरक्षा को लेकर कभी कोई समस्या नहीं आई है। स्थानीय लोगों और समितियों का अटूट विश्वास ही इस परंपरा की असली ताकत है। चौधरी बाजार पूजा मंडप में साल 1956 में पहली बार चांदी की पृष्ठभूमि यानी ‘चांदी मेधा’ की शुरुआत की गई थी, जिसके बाद से यह परंपरा लगातार बढ़ती गई। आज भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वेच्छा से योगदान देते हैं, जिससे यह आयोजन और अधिक भव्य बनता जाता है।

