दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं की हिरासत के बाद उनके ठिकानों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को वकीलों और सहयोगियों से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
अभिजीत दिपके और नेहा बोरा की स्थिति पर चिंता
संगठनों के अनुसार, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद से उनके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। CJP ने पुलिस से संपर्क साधने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि उन्हें किस जगह और किन नियमों के तहत रखा गया है। वहीं, AISA ने भी आरोप लगाया है कि नेहा बोरा को पहले एक अन्य सुविधा केंद्र ले जाया गया और फिर वहां से किसी अज्ञात स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।
कानूनी मदद और वकीलों की पहुंच पर रोक का आरोप
विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया है कि हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को उनके कानूनी सलाहकारों और परिवारों से मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए। नेताओं का कहना है कि हिरासत के बावजूद नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए और पुलिस को तुरंत उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारू रखने के लिए लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा राजधानी के कई हिस्सों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

