प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशव्यापी साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से एक वकील को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
एयरपोर्ट पर ऐसे हुई कार्रवाई
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की पणजी यूनिट की एक टीम ने रशेष उपाध्याय उर्फ रशेष शाह नामक वकील को बोर्डिंग गेट के पास उस समय रोका जब वह दिल्ली जाने वाली उड़ान पकड़ने की तैयारी कर रहा था। इस कार्रवाई में सीमा शुल्क विभाग और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के अधिकारियों ने भी सहयोग किया। इसके बाद आरोपी को पणजी ले जाकर विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे एजेंसी की हिरासत में भेज दिया गया।
गोवा पुलिस की प्राथमिकी से शुरू हुई थी जांच
केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक, इस मामले की जांच तब शुरू हुई जब गोवा पुलिस ने जून 2025 में एक प्राथमिकी दर्ज की। गोवा की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने कई फर्जी खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस बड़े नेटवर्क ने भारी-भरकम राशि के लेनदेन किए हैं और पूरे देश में इस तरह की कई शिकायतें दर्ज हैं।
फर्जी खातों और रिश्वत का खेल
एजेंसी का आरोप है कि पकड़ा गया वकील इस पूरे नेटवर्क का एक अहम हिस्सा था। जब पुलिस शिकायतों के बाद इस धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज किया गया था, तो उसने संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को रिश्वत देकर उन खातों को अनफ्रीज करवाया था। इस पूरी प्रक्रिया में अवैध रूप से नकदी का लेनदेन किया गया था। जांच एजेंसी अब इस मामले में अन्य संलिप्त अधिकारियों, बिचौलियों और अपराध से जुड़ी पूरी रकम का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट पर सरकार की चेतावनी
गौरतलब है कि डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें ठग कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों को वीडियो कॉल या ऑडियो कॉल के माध्यम से डराते हैं और ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। इस तरह के किसी भी धोखे या अपराध की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर या संबंधित वेब पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

