Site icon Memoirs Publishing

प्रशांत महासागर में अल नीनो ने तोड़े तापमान के सभी रिकॉर्ड, जानिए भारत पर इसका असर

प्रशांत महासागर में अल नीनो ने तोड़े तापमान के सभी रिकॉर्ड, जानिए भारत पर इसका असर

प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो ने तापमान के मामले में नया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया है, जिससे दुनियाभर के मौसम चक्र के साथ-साथ भारत के मानसून पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र की सतह का तापमान काफी अधिक दर्ज किया गया है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।

क्यों टूट रहे हैं तापमान के पुराने रिकॉर्ड?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस गर्माहट का सीधा प्रभाव हवाओं की दिशा और मानसूनी बादलों की चाल पर पड़ता है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों का मौसम भी प्रभावित होता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, इस बार का अल नीनो काफी शक्तिशाली है और नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है।

भारत के मौसम और मानसून पर प्रभाव

भारत के लिए यह मजबूत होता अल नीनो बारिश में कमी और बढ़ते तापमान के रूप में चिंता का विषय बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, देश का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ समाप्त हुआ है। इसके साथ ही, आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने और कम बारिश का जोखिम बना हुआ है।

वर्ष 2027 की शुरुआत तक रह सकता है असर

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का मौसम केवल अल नीनो पर ही निर्भर नहीं रहता, बल्कि इसमें अन्य स्थानीय और जलवायु कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, प्रशांत महासागर का अत्यधिक गर्म होना भारी गर्मी और असामान्य मौसम की घटनाओं के खतरे को बढ़ा देता है और इसका यह प्रभाव वर्ष 2027 की शुरुआत तक जारी रहने की संभावना है। वैज्ञानिक लगातार समुद्र की बदलती स्थितियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

Exit mobile version