केंद्र सरकार द्वारा रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में हाल ही में की गई बढ़ोतरी से किसान संगठन नाखुश दिखाई दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह वृद्धि खेती की बढ़ती लागत और महंगाई के अनुपात में बेहद कम है।
गेहूं के एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी पर सवाल
आगामी रबी सीजन 2027-28 के लिए सरकार ने गेहूं के एमएसपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की ही बढ़ोतरी की है, जिसके बाद यह 2,585 रुपये से बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। किसान नेताओं का तर्क है कि यह बढ़ोतरी मात्र 0.96 प्रतिशत है, जो कि मौजूदा समय में खेती पर आ रहे भारी खर्च को देखते हुए नाकाफी है।
लागत और महंगाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने सरकार से मांग की है कि एमएसपी की घोषणा के साथ-साथ खेती के खर्च और महंगाई से जुड़े आंकड़े भी स्पष्ट किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में तनाव के चलते कीटनाशकों, डीजल, सल्फर और अन्य कृषि आदानों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। किसानों का यह भी कहना है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना और पंतनगर द्वारा गेहूं उत्पादन की क्या लागत निकाली गई है, इस जानकारी को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
व्यापक उत्पादन लागत और कर्ज का संकट
संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य पी. कृष्ण प्रसाद ने बताया कि आयोग प्रमुख राज्यों में व्यापक अवसर लागत को ध्यान में रखकर सी2 (C2) लागत का आकलन करता है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2 लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे की गारंटी की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। किसान नेताओं का मानना है कि यदि कृषि से मिलने वाला रिटर्न कम होता रहा, तो किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।
इसके अलावा, कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की ‘रबी फसलों के लिए मूल्य नीति 2027-28’ से संबंधित रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में न लाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। किसान संगठनों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक मूल्य निर्धारण के आधार और आंकड़े पारदर्शी नहीं होंगे, तब तक किसानों की चिंताओं को पूरी तरह से दूर नहीं किया जा सकता है।

