हरियाणा के यमुनानगर जिले के औरंगाबाद गांव के पास किसानों ने धान खरीद की सरकारी व्यवस्थाओं में खामियों का आरोप लगाते हुए पंचकूला-सहारनपुर हाईवे के एक हिस्से को जाम कर दिया। किसानों का मुख्य रोष यह था कि उनकी उपज की खरीद समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस दौरान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन ने पहले 25 सितंबर और फिर 29 सितंबर से धान खरीद शुरू होने का आश्वासन दिया था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर किसानों को अब तक राहत नहीं मिली है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो करनाल में महापंचायत बुलाई जाएगी और आंदोलन को और व्यापक रूप किया जाएगा। हालांकि, अधिकारियों द्वारा समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने हाईवे से जाम हटा लिया। इस प्रदर्शन के समर्थन में किन्नर समुदाय के लोग भी सड़कों पर उतरे और अन्नदाताओं की समस्याओं को जल्द सुने जाने की मांग की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और मंडियों का हाल
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने करनाल मंडी पहुंचकर धान खरीद व्यवस्थाओं का जायजा लिया और किसानों तथा आढ़तियों से बातचीत की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नमी के नाम पर किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही है, जिसके चलते उन्हें कम दामों पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने पहले ही सभी जिला उपायुक्तों को खरीद व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं और दावा किया है कि मंडियों में आने वाले धान के हर एक दाने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी।

