सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस हेमंत गुप्ता ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अटूट भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी को सरकार के कामकाज से कोई असंतोष है, तो उसका समाधान चुनाव के माध्यम से किया जाना चाहिए। चुनावी मैदान में असफलता मिलने के बाद पूरी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है।
संस्थाओं पर भरोसा रखना बेहद जरूरी
एक साक्षात्कार के दौरान पूर्व जस्टिस ने कहा कि नागरिकों को देश की प्रमुख संस्थाओं पर पूरा विश्वास रखना चाहिए। सरकारों से मतभेद या शिकायतें होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इसके लिए लोकतांत्रिक तरीकों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। चुनाव हर कुछ समय बाद आते हैं और जनता के पास यह अधिकार होता है कि वे मतदान के जरिए सरकारों को बदल सकें या हरा सकें।
चुनावी हार के बाद आरोप लगाना गलत
पूर्व जस्टिस हेमंत गुप्ता ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि चुनाव में हार मिलने के बाद केवल अपनी बात को ही एकमात्र सही ठहराना और व्यवस्था को दोषी ठहराना गलत रवैया है। उन्होंने कहा कि शासन और न्याय की व्यवस्था इस प्रकार से कार्य नहीं करती है कि केवल एक पक्ष की बात को ही अंतिम सत्य मान लिया जाए।
चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता का दिया उदाहरण
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा चुनावी प्रणाली के जरिए ही विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में विपक्षी दलों ने भी सफलतापूर्वक अपनी सरकारें बनाई हैं। इसी प्रकार अन्य राजनीतिक दलों को भी समय-समय पर इसी व्यवस्था के अंतर्गत सफलता मिलती रही है, जो यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक प्रणाली निष्पक्ष रूप से कार्य कर रही है।

