मध्य पूर्व के तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कॉर्पोरेट कमाई के कमजोर आंकड़ों के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर के महीने में भारतीय इक्विटी बाजारों से भारी निकासी की है। आंकड़ों के अनुसार, इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से कुल 48,056 करोड़ रुपये बाहर निकाल लिए हैं। इससे पहले सितंबर के महीने में भी विदेशी निवेशकों ने 35,861 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, एक बड़े आईपीओ द्वारा बाजार की तरलता को अस्थायी रूप से अपने पाले में खींचने और वैश्विक पोर्टफोलियो पुनर्गठन ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाने का काम किया है।
बिकवाली की रफ्तार में आई नरमी
हालांकि अक्टूबर के दौरान बड़ी निकासी देखने को मिली, लेकिन महीने के अंतिम हफ्तों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली की रफ्तार में कुछ नरमी जरूर दर्ज की गई। कुछ सत्रों में FPI शुद्ध खरीदार के रूप में भी उभरे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और रुपये के मूल्य में सुधार के चलते निवेशकों के रुख में यह हल्का बदलाव देखने को मिला है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और एसआईपी (SIP) के जरिए आने वाले निरंतर निवेश ने इस बिकवाली के बड़े झटके को काफी हद तक संभाल कर रखा है।
ऋण बाजार और आगामी रुझान
शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में ऋण (डेट) बाजार से भी पूंजी निकाली है। Fully Accessible Route और Voluntary Retention Route के माध्यम से निकासी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों, केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों और भू-राजनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णय
- घरेलू कॉर्पोरेट कमाई के आंकड़े

