कम वेतन और निश्चित घंटों के अभाव में गिग वर्कर्स और अन्य सेवा प्रदाताओं को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यधिक लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ता है। अपर्याप्त नींद और लगातार थकान न केवल उनकी व्यक्तिगत सेहत को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में सुरक्षा जोखिमों को भी बढ़ा देती है।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की एक चौंकाने वाली घटना
हाल ही में मुंबई से पुणे की यात्रा के दौरान एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को उस समय अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा जब उन्होंने पाया कि उनकी कैब का ड्राइवर लगातार झपकी ले रहा था। एक्सप्रेस-वे जैसे व्यस्त मार्ग पर पलभर की लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए यात्री ने खुद गाड़ी चलाने का निर्णय लिया और ड्राइवर को पीछे सीट पर आराम करने दिया। इस घटना के बाद कैब एग्रीगेटर ने संबंधित ड्राइवर का ऐप एक्सेस समाप्त कर दिया, लेकिन यह वाकया एप-बेस्ड ड्राइवरों की कठिन कामकाजी परिस्थितियों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
कम आमदनी और सुरक्षा गार्डों की दुर्दशा
इसी तरह की स्थिति आवासीय सोसायटियों के सुरक्षा गार्डों की भी देखने को मिलती है, जिन्हें लंबी शिफ्टों के बावजूद बेहद कम वेतन मिलता है। मुंबई जैसे महंगे शहरों में न्यूनतम आय से परिवार चलाना कठिन होने के कारण कई गार्ड दूसरी शिफ्ट भी करने को मजबूर होते हैं। लगातार 18 से 20 घंटे काम करने के कारण उन्हें पर्याप्त आराम या नींद नहीं मिल पाती है, जिससे उनकी सतर्कता और प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित होती है।
थकान और स्वास्थ्य पर इसका गंभीर प्रभाव
नींद की कमी का सीधा असर मानव मस्तिष्क के निर्णय लेने की क्षमता, एकाग्रता और भावनात्मक नियंत्रण पर पड़ता है। सुरक्षा और संवेदनशीलता से जुड़े कार्यों में ऐसी थकान के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। हालांकि अतिरिक्त घंटों काम करने से परिवार की तत्काल आर्थिक जरूरतें जैसे स्कूल की फीस या राशन का प्रबंध हो जाता है, लेकिन लंबे समय में यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचाता है। जब तक श्रमिकों को केवल एक शिफ्ट के काम से ही उनकी आजीविका चलाने योग्य उचित वेतन नहीं मिलेगा, तब तक सुरक्षा से जुड़े ऐसे जोखिम बने रहने की आशंका है।

