जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में कर प्रशासन से जुड़े कई बड़े बदलावों पर विचार किया जा सकता है, जिसके तहत कर अधिकारियों के गिरफ्तारी के अधिकारों को हटाने का प्रस्ताव शामिल है। यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो किसी भी गिरफ्तारी के लिए अदालत के आदेश की आवश्यकता होगी। यह बदलाव सरकार के नेक्स्ट-जेनरेशन जीएसटी सुधार एजेंडे का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अभियोजन और गिरफ्तारी से जुड़े नियमों में बदलाव
सूत्रों के अनुसार, आगामी बैठक में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की सीमा को मौजूदा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा, वर्गीकरण, मूल्यांकन या इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े सामान्य विवादों को अभियोजन प्रावधानों के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है, जहां करदाताओं और अधिकारियों के बीच अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं।
प्रस्तावित बदलावों के तहत, केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 में संशोधन किया जा सकता है, जो वर्तमान में अधिकारियों को कुछ शर्तों के तहत गिरफ्तारी की अनुमति देती है। हालांकि, कर वसूली और वित्तीय जुर्माना लगाने की सरकार की शक्तियां बनी रहेंगी। गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर कर चोरी के मामलों में अदालतों के माध्यम से कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने की तैयारी
इस व्यापक सुधार पैकेज का उद्देश्य अनुपालन लागत को कम करना, प्रशासन को सरल बनाना और प्रवर्तन को अधिक संतुलित बनाना है। इसके साथ ही, छोटे करदाताओं के लिए लेट फीस माफ करने और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से कर व्यवस्था में दंडात्मक उपायों के बजाय डेटा आधारित और तकनीक आधारित निरीक्षण को बढ़ावा मिलेगा। व्यवसायों को भी इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कर विवादों के मामले में त्वरित गिरफ्तारी की आशंका कम होगी और मामलों का समाधान वित्तीय देनदारी और जुर्माने के जरिए किया जा सकेगा।

