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हेल्दी एजिंग के लिए “बैलेंस डाइट” से क्यों बेहतर है “हेल्दी डाइट”

हेल्दी एजिंग के लिए "बैलेंस डाइट" से क्यों बेहतर है "हेल्दी डाइट"

हाल ही में एक टेलीविजन शो के दौरान मशहूर फिल्म कलाकारों ने अपनी जीवनशैली और खान-पान की आदतों को लेकर कुछ दिलचस्प खुलासे किए। इसके बाद सोशल मीडिया पर भोजन और आहार से जुड़े विभिन्न तौर-तरीकों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कई बार लोग किसी एक खास सब्जी या सुपरफूड को अपनी सेहत की कुंजी मान लेते हैं, लेकिन पोषण विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए आहार में विविधता होना बेहद जरूरी है।

संतुलित आहार की असल परिभाषा क्या है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एक बेहतरीन आहार मुख्य रूप से चार सिद्धांतों पर आधारित होता है – पोषण की पर्याप्तता, संतुलन, सीमित मात्रा और विविधता। इसका सीधा मतलब यह है कि शरीर की ऊर्जा जरूरत के हिसाब से कैलोरी का सेवन किया जाए और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व फैट लिए जाएं। केवल एक ही तरह का खाद्य पदार्थ सभी पोषक तत्वों की कमी को पूरा नहीं कर सकता।

आहार में विविधता और रंगों का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि रोज एक जैसा खाना खाने से शरीर को मिलने वाले पोषक सीमित हो जाते हैं। इसके बजाय अपनी थाली में अलग-अलग रंगों की सब्जियों और फलों को शामिल करना चाहिए। लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च, गाजर, शकरकंद, ब्रोकली और टमाटर जैसी चीजें खाने से शरीर को विटामिन, मिनरल और फाइटोकेमिकल्स भरपूर मात्रा में मिलते हैं। पकाने के बाद कई सब्जियों के पोषक तत्व शरीर में और आसानी से अवशोषित हो जाते हैं।

प्रोटीन के वैकल्पिक और पारंपरिक स्रोत

आजकल लोग केवल एक खास प्रकार के प्रोटीन पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं, जिससे साबुत अनाज, फल, दालें और नट्स जैसे अन्य जरूरी खाद्य पदार्थ पीछे छूट जाते हैं। इसलिए डेयरी और मांस के अलावा छोले, राजमा, काले बीन्स, टोफू, सोयाबीन और विभिन्न बीजों को भी भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। इनसे फाइबर के साथ-साथ ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने वाले मैग्नीशियम और पोटेशियम भी मिलते हैं।

पुरानी जीवनशैली अपनाना है बेहतर विकल्प

यदि खान-पान के वैज्ञानिक नियमों को समझने में उलझन हो, तो अपने बुजुर्गों और पूर्वजों की खान-पान की आदतों को अपनाया जा सकता है। वे लोग अपने भोजन में ताजे फल और सब्जियों को प्राथमिकता देते थे। प्लेट का आधा हिस्सा इनसे ही भरा होना चाहिए। इस प्रकार की सही जीवनशैली अपनाने से बिना किसी गंभीर बीमारी के लंबी और स्वस्थ उम्र जीने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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