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युवाओं में हार्ट अटैक और कोविड वैक्सीन को लेकर आईसीएमआर अध्ययन में सामने आए नए तथ्य

युवाओं में हार्ट अटैक और कोविड वैक्सीन को लेकर आईसीएमआर अध्ययन में सामने आए नए तथ्य

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए गए एक बहु-केंद्रित अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कोविड-19 वैक्सीन की दो या उससे अधिक खुराक लेने और युवाओं में दिल का दौरा पड़ने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। इस शोध के जरिए सोशल मीडिया पर फैल रही उन अफवाहों को खारिज किया गया है जिनमें युवाओं की अचानक मौत या दिल के दौरों को टीके के दुष्प्रभावों से जोड़ा जा रहा था।

अध्ययन की प्रक्रिया और मुख्य निष्कर्ष

देशभर के 25 प्रमुख अस्पतालों में अक्टूबर 2021 से जनवरी 2023 के बीच किए गए इस अध्ययन में 18 से 45 वर्ष की आयु के लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने उन मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया जिन्हें पहली बार दिल का दौरा, इस्केमिक स्ट्रोक या रक्त के थक्के जमने की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिणामों में पाया गया कि कोविड-19 वैक्सीन की खुराक लेने वालों और न लेने वालों के बीच दिल के दौरे के जोखिम में कोई सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं था।

किन कारणों से बढ़ रहा है जोखिम?

अध्ययन के अनुसार, दिल के दौरे और रक्त का थक्का जमने की घटनाओं के पीछे पारंपरिक स्वास्थ्य जोखिम और जीवनशैली मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। शोध में पाया गया कि पहले से मौजूद बीमारियां, धूम्रपान, रक्त के थक्कों का पारिवारिक इतिहास और गंभीर कोविड-19 संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने का इतिहास इन घटनाओं से जुड़ा हुआ है। Covishield और Covaxin दोनों प्रमुख टीकों के डेटा के विश्लेषण में भी टीकाकरण से किसी प्रकार का अतिरिक्त जोखिम नहीं देखा गया।

विशेषज्ञों की सलाह और जीवनशैली में बदलाव

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घटना को बिना वैज्ञानिक जांच के सीधे टीके से जोड़ना सही नहीं है। युवाओं को अपने स्वास्थ्य और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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